दोस्तों बहुत पहले कि बात है, एक रियासत था जिसका नाम रामगढ़ था . रामगढ़ रियासत के लोग बहुत ही इमानदार एवं खुशमिजाज थे . उसी रियासत में एक बहुत बड़ी नदी थी  जो वहाँ के लोगों के साथ साथ रामगढ़ में रहने वाले सभी जीवों के जीवनयापन  का मुख्य श्रोत थी.

उस नदी के पास तीन दोस्त, स्वर्ण एवं रजत नाम के दो हंश एवं कवच नाम का एक कछुआ रहते थे . तीनो एक दुसरे को बहुत पहले से जानते थे एवं जब भी दोनों हंश नदी के किनारे आते तो कवच भी नदी से बाहर निकलकर आता एवं तीनो घंटो वहीँ किनारे बैठ के आपस में बाते किया करते थे . उनकी ज़िन्दगी हसी ख़ुशी बीत रही थी, किन्तु उनकी ये ख़ुशी ज्यादे दिन नहीं रही एवं एक वर्ष रामगढ़ में भयानक सुखा पड़ा एवं नदी का अधिकाँश भाग जलविहीन हो गया . वहाँ रहने वाले सभी जीव जंतु प्यास के मारे दम तोड़ने लगे . अधिकांशतः लोग तो उस इलाके को छोडके किसी नए जलश्रोत कि तलाश में रामगढ़ को छोडके जाने लगे.

एक दिन तीनो मित्रों ने आपातकालीन बैठक इस गंभीर समस्या का उपाय निकालने के लिए बुलाई. तय समय पर तीनो मित्र पूर्व निर्धारित स्थल पे पहुच गए . तीनो आपस में बात करने लगे एवं अंततः इस निष्कर्ष पे पहुचे कि अपने प्राण कि रक्षा हेतु उन्हें भी शीघ्र अतिशीघ्र जल के नए श्रोत कि खोज करनी पड़ेगी .

चूँकि हंश उड़ सकते थे इसलिए उन्होंने अपने कछुए मित्र से ये वादा करके वहां से उड़ गए कि वे शीघ्र ही नए जल श्रोत कि तलाश करके वापस आयेंगे और फिर तीनो वहां चले जायेंगे और तब तक कछुआ उनका इन्तेजार करेगा .

देखते ही देखते कई दिन बीत गए पर हंशों का कुछ पता नहीं चला, कछुआ ये सोचकर परेशान था कि कहीं उसके मित्रों को तो कुछ नहीं हो गया. आख़िरकार एक शाम जब कछुआ नदी किनारे एक टीले पे उदास बैठकर अपने मित्रों के बारे में सोच ही रहा था कि उसको आसमान में उड़ते हुए दो पक्षी दिखाई दिए और जब वे थोडा और पास आये तो उसको आभास हुआ कि ये कोई और नहीं बल्कि उसके ही मित्र थे जो कि नयी जल श्रोत कि जानकारी ले के वापिस आये थे. कछुए ने जब ये समाचार सुना तो वो ख़ुशी से झूम उठा. किन्तु उनकी ये ख़ुशी जल्द ही गायब हो गयी क्यूंकि अब एक नयी समस्या आ गयी थी जिसके तरफ तो किसीने ध्यान ही नहीं दिया था. समस्या ये थी कि नया जलश्रोत वहां से काफी दूर दुसरे राज्य में था एवं हंश तो आराम से उड़ के वहां पुच सकते थे लेकिन कछुआ तो वहां पहुचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ देगा. वहां फिर एक खामोशी छा गयी. अचानक से कछुए के दिमाग में एक जबरदस्त उपाय आया उसने हंशों से कहा मित्रों मुझे उपाय मिल गया है अब ध्यान से सुनो हंश काफी खुश हुयें और वे कछुए के उपाय को ध्यान से सुनने लगे.

कछुए ने कहा देखो मित्रों जैसा कि तुम लोग उड़ सकते हो तो मैंने एक ऐसा उपाय सोचा है कि मैं भी तुम लोगों के साथ उड़ सकूंगा, हंश बड़ी ही विस्मयता के साथ कछुए कि बात सुन रहे थे उन्होंने बोला अगर ऐसा हो जाए तब तो मजा ही आ जाएगा मगर ये तो बताओ कि ऐसा होगा भला कैसे. कछुए ने कहा बहुत ही आसान है तुम लोग वो लकड़ी देख रहे हो न हंशों ने कहा हाँ, उस लकड़ी को तुम दोनों अपने चोंच में दबा लेना और मैं उसके बीच भाग को अपने मुंह से पकड़ लूँगा और इस प्रकार जब तुम लोग उडोगे तो तुम लोगों के साथ मैं भी उड़ पाऊंगा हालांकि तुम लोगों को थोडा अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ेगा पर हम तीनो उस नए जल श्रोत तक पहुच जायेंगे, ये सब बताते हुए कछुआ काफी उत्साहित था पर हंशों के चेहरे पे चेहरे पे चिंता कि लकीरें साफ़ साफ़ देखि जा सकती थी. अपने मित्रों को चिंतित देख के कछुए ने पुचा क्यूँ मित्रों क्या मुझे साथ में लेके उड़ने में तुम लोगों कपो कोई परेशानी है?

हंशों ने कहा अरे नहीं मित्र ऐसी कोई भी बात नहीं है हम तो बड़ी ही ख़ुशी ख़ुशी तुम्हे लेके उड़ जायेंगे लेकिन हम किसी और बात से परेशान हैं, कछुए ने कहा क्या परेशानी है मित्रों मुझे बताओ.

जैसा कि हंश और कछुआ बहुत पुराने मित्र थे इसलिए वे एक दुसरे के गुणों के साथ अवगुणों से भी परिचित थे और वे कछुए के ही एक अवगुण के बारे में सोच  के उस समय परेशान थे. अवगुण ये था कि कछुआ बहुत ही बातूनी था. हंशो ने कहा देखो मित्र हम जानते हैं कि तुम्हे बात करना कितना पसंद है और हमें उससे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन तुम्हे हमसे एक वादा करना पड़ेगा कि जब हम दोनों तुम्हे लेके आकाश में उड़े तो उड़ने के पश्चात तुम कुछ नहीं बोलोगे अन्यथा जो लकड़ी तुम अपने मुंह में मकड़े रहोगे वो छुट जायेगी और तुम जमीन पे गिर जाओगे और तुम काफी चोटिल भी हो सकते हो. कछुए ने उनकी बात सुनके कहा बस इतनी सी बात से तुम लोग परेशान हो रहे थे तो लो मैं वादा करता हूँ कि एक बार जमीन छोड़ने के बाद मैं कुछ भी नहीं बोलूँगा.

कछुए से आश्वाशन पाके हंशो ने अपने कछुए मित्र को लेके उड़ना शुरू कर दिया. वे जहां से भी जाते लोग ये अद्भुत नजारा देख के हतप्रभ रह जाते और जोर जोर से चिल्लाने लगते अब कैसी परिस्थिति में कछुए को बोलने का मन तो बहुत कर रहा था लेकिन वो अपने वाडे को याद करता और चुप ही रहता था.

काफी देर तक ऐसे ही उड़ते उड़ते वे एक शहर के ऊपर से गुजर रहे थे कि वहां के लोग भी ये अद्भुत नजारा देखके हतप्रभ रह गए एवं वहां के बच्चे ताली बजाके चिल्लाने लगे. और जिस बात का दर हंशों को था आखिरकार वही हुआ कछुआ अपना वादा भूल गया वो लोगों कि ख़ुशी का कारण जानना चाहता था और अपने मित्रों से पूछने के लिए उसने अपना मुंह खोल ही दिया और मुंह खोलते ही उसके मुंह से लकड़ी कि पकड़ छुट गयी और वो जाके जमीन पे गिर गया और काफी उचाई से गिरने के कारण उसके प्राण पखेरू उड़ गए. अपने मित्र कि ये दुर्दशा देखकर दोनों हंश काफी दुखी थे लेकिन वे अब कुछ नहीं कर सकते थे और भारी मन से वे वहाँ से चले गए.

दोस्तों इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि किसी के अच्छे सलाह पर अमल करने में हमारी ही भलाई है.

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