हरतालिका तीज को तीजा भी कहते हैं। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र के दिन होता है। इस दिन अविवाहित और विवाहित स्त्रियाँ गौरी-शंकर की पूजा करती हैं। विशेषकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार में मनाया जाने वाला यह त्योहार करवाचौथ से भी कठिन माना जाता है क्योंकि जहां करवाचौथ में चांद देखने के बाद व्रत तोड़ दिया जाता है वहीं हरतालिका तीज व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत किया जाता है और अगले दिन पूजन के पश्चात ही व्रत तोड़ा जाता है। इस व्रत से जुड़ी एक मान्यता यह है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वती जी के समान ही सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं।

यह पर्व भारत के विभिन्न भागों जैसे-उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान आदि स्थानों के साथ-साथ नेपाल में भी बड़ी ही उत्साह के साथ मनाया जाता है l

त्यौहार का नाम हरतालिका तीज
दिनांक21 अगस्त
पूजा मुहूर्त २०२० प्रातःकाल 05:53-08:29 और सायंकाल 06:54-09:06 तक
तिथि भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि
अराध्य भगवान् शिव

तीज क्या है ? (What is Teej?)

हरतालिका तीज के बारे में जानने से पहले आइये जानते हैं कि तीज क्या है? इसे कहाँ मनाया जाता है? इसे कौन मनाता है? भारतीय महिलाओं द्वारा मनाये जाने वाले त्योहारों को एक सामान्य नाम दिया जाता है | जिससे लोगों को इन्हें याद रखने और समझने में आसानी हो और इसी सामान्य नाम को हम आम बोल-चाल की भाषा में ‘तीज’ कहते हैं l तीज का यह महत्वपूर्ण त्यौहार भारत के उत्तरी एवं मध्य भाग में मुख्यतः मनाया जाता है l तीज के इन पर्वों की शुरुआत भारत के इन भागों में मानसून के स्वागत में मनाया जाता है l अगर हम तीज के शाब्दिक अर्थ को देखेंगे तो हम पायेंगे कि प्रत्येक माह में पड़ने वाले अमावस्या के बाद के तीसरे दिन और पूर्णिमा के बाद पड़ने वाले तीसरे दिन को तीज कहते हैं

हरतालिका तीज का महत्व (Importance of Hartalika Teej)

तीजा या हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता है l यह तीज का त्यौहार भादों की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैl कम उम्र की लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ समझा जाता हैl हरतालिका तीज में भगवान् शिव, माता गौरी एवं गणेश जी की पूजा का महत्व हैl यह व्रत निराहार एवं निर्जला किया जाता हैl रात्रिजागरण कर नाच-गाने के साथ इस व्रत को किया जाता है l

‘हरतालिका’ नाम का रहस्य (Secret behind name ‘Hartalika’)

हिमालय की पुत्री, पार्वती जी भगवान् शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं, अपनी पुत्री की मंशा से अनभिज्ञ हिमालय ने उनका विवाह भगवान् विष्णु से तय कर दिया था l उस वक़्त पार्वती की सहेलियों ने उन्हें इस विवाह से दूर करने के लिए अगवा कर लिया था, इस कारण से इस व्रत को हरतालिका कहा गया है क्यूंकि ‘हरत’ का मतलब अगवा करना एवं ‘आलिका’ का मतलब सहेली अर्थात सहेलियों द्वारा अपहरण करना ‘हरतालिका’ कहलाता हैl

शिव जैसा पति पाने के लिए अविवाहित कन्याये इस व्रत को विधि-विधान से करती हैंl  

तीज व्रत का मुहूर्त एवं समय

तीजा भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता हैl यह आमतौर पर अगस्त-सितम्बर के महीने में ही पड़ता हैl इस व्रत को गौरी तृतीया व्रत भी कहते हैंl यह वर्ष २०२० में २१ अगस्त को मनाया जाएगाl

हरतालिका तीज व्रत के नियम (Rules of Fasting in Hartalika Teej)

1. हरतालिका व्रत निर्जला किया जाता है, अर्थात पूरा दिन एवं रात अगले सूर्योदय तक जल ग्रहण नहीं किया जाता हैl

2. हरतालिका व्रत अविवाहित, विवाहित एवं विधवा महिलायें भी कर सकती हैंl

3. अगर आपने व्रत करना शुरू कर दिया है तो आपको इसे बीच में छोड़ना नहीं चाहिए एवं प्रत्येक वर्ष नियमों के साथ किया जाता हैl

4. हरतालिका व्रत में सोना वर्जित है एवं इस व्रत को करने वाली महिलायें रात्रिजागरण करती है एवं नए वस्त्र एवं पूर्ण श्रृंगार करके एक जगह एकत्र होकर नाच-गाना एवं भजन करती हैंl

5. हरतालिका व्रत अगर किसी घर में प्रारम्भ किया गया है तो इसका खंडन नहीं किया जा सकता अर्थात इसे एक परंपरा के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता हैl

हरतालिका व्रत से जुड़ी कई मान्यताएं हैं, जैसे अगर इस व्रत को करने वाली महिला अगर इस व्रत के दौरान सोती है तो वो अगले जनम में अजगर का जन्म पाती है, जो महिला दूध का सेवन करती है वो सर्पिनी का जन्म पाती है, जो शक्कर खाती है वो मक्खी का जन्म पाती है, जो मांस का सेवन करती है वो अगले जन्म में शेरनी का जन्म पाती है, जो जल पीती है वो मछली का जन्म पाती हैl ऐसे भी और कई मान्यताएं भारत के विभिन्न राज्यों एवं स्थानों से जुडी हुई हैंl  

हरतालिका व्रत पूजन सामग्री

  1. केले का पत्ता
  2. फूलेरा जोकि विशेष प्रकार के फूलों से सजा होता है
  3. गीली काली मिट्टी अथवा रेत
  4. फल
  5. बेल-पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल, अकाँव का फूल, तुलसी, मंजरी
  6. माता गौरी के लिए सुहाग का सामान जैसे-चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिन्दूर, माहौर, मेहँदी, आदिl
  7. घी, तेल, दीपक, कपूर, अबीर, चन्दन, श्री फल, कलश इत्यादि
  8. पंचामृत – घी, दही, शक्कर, दूध, शहद

हरतालिका तीज पूजन विधि

  1. हरतालिका पूजन प्रदोष काल ( दिन और रात के मिलने वाला काल ) में किया जाता है l
  2. व्रत पूजन के लिए शिव, पार्वती, एवं गणेश जी कि प्रतिमा काली मिटटी या फिर रेत से हाथों से बनायी जाती है l
  3. फूलेरा बनाकर उसे सजाया जाता है, उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर चौकी रखी जाती है, चौकी पर एक सातिया बनाकर उस पर थाल रखते हैं, उस थाल में केले के पत्ते को रखते हैं l
  4. तीनो प्रतिमाओं को केले के पत्ते पर आसीत किया जाता है l
  5. सर्वप्रथम एक कलश बनाया जाता है जिसके लिए एक लोटा या घड़ा लेते हैं l उस कलश के ऊपर श्रीफल रखा जाता है एवं कलश का मुख लाल डोरे से बांधते हैं l कलश पर सातिया बनाकर उसपर अक्षत चढ़ाया जाता है l 
  6. सर्वप्रथम कलश की पूजा कुमकुम, हल्दी एवं अक्षत चढ़ाके करते हैं उसके बाद गणेश जी की पूजा की जाती है l गणेश जी की पूजा करने के बाद भगवान् शिव एवं माता गौरी की पूजा उनका सम्पूर्ण श्रृंगार चढ़ाके की जाती है l सभी पूजन के बाद भगवान् की परिक्रमा एवं हरतालिका व्रत कथा पढ़ी जाती है l
  7. फिर सभी लोग मिलकर आरती करते हैं जिसमे सर्वप्रथम गणेश जी की फिर शिव जी की आरती एवं फिर माता गौरी की आरती की जाती है l
  8. रात भर जागकर पूजा एवं आरती की जाती है l सुबह आख़िरी पूजा के बाद माता गौरी को जो सिन्दूर चढ़ाया जाता है उस सिन्द्दोर से सुहागिन स्त्रियाँ सुहाग लेती हैं l
  9. हरतालिका तीज व्रत को तोड़ने के लिए भोग में चढ़ाए गए ककड़ी एवं हलवे को खाया जाता है l
  10. अंत में सभी पूजन सामग्री को एकत्र कर नदी में विसर्जित किया जाता है, हालांकि ऐसा ना करने की सलाह आपको हमारे द्वारा दी जाती है क्यूंकि ऐसा करना अब भारतीय क़ानून के तहत अपराध माना जाता है l    

हरतालिका तीज व्रतकथा

हरतालिका तीज व्रत अच्छे पति की कामना से एवं पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाता है l

शिव जी ने माता पार्वती को विस्तार से इस व्रत का महत्व समझाया – माता गौरा ने सती होने के बाद अपने अगले जन्म में  हिमालय या जिन्हें राजा हिमावत भी कहा जाता है, के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया l बचपन से ही पार्वती, भगवान् शिव को वर के रूप में चाहती थीं l जिसके लिए पार्वती जी ने कठोर तपस्या की | उन्होंने कडकडाती ठण्ड में पानी में खड़े रहकर, भीषण गर्मी में यज्ञ किया l

उधर देवर्षि नारद के सलाह पर हिमालय अपनी पुत्री पार्वती का विवाह भगवान् विष्णु से करने के लिए तैयार हो गए l जब ये बात हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती जी को बतायी तो यह खबर सुनकर पार्वती जी दुखी हो गयीं और अपना दुःख अपनी सखियों को बताया और प्राण त्यागने तक की बात कह डाली l ऐसा वचन उनके मुख से सुनकर उनकी सखियों ने उन्हें दिलासा दिया और एक युक्ति के तहत पार्वती जी का हरण कर उन्हें घने वन में ले गयीं l उस वन में पार्वती जी ने शिवलिंग की स्थापना करके भीषण तपस्या किया और उनकी इस तपस्या से खुश होकर शिव जी ने दर्शन दिए और पार्वती जी को आशीर्वाद दिया और पति रूप में मिलने का वर दिया l

और बाद में हिमालय ने अपने पुत्री कि जब ये कथा सुनी तो अपनी पुत्री के प्रेम, समर्पण एवं हठ के आगे उन्हें भी झुकना पड़ा और वो पार्वती जी का विवाह भगवान् शिव से कराने के लिए तैयार हो गए l

शिव और पार्वती के इसी मिलन को याद करके एवं उनके जैसा ही सौभाग्य पाने के लिए हरतालिका व्रत प्रतिवर्ष भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है l  

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