गजाननम् भूतगणादिसेवितम् कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम् i

उमासुतम् शोकविनाशकारकम् नमामिविघ्नेश्वर पादपंकजम् ii

त्यौहार का नामगणेश चतुर्थी
तिथि22, अगस्त 2020
अराध्यभगवान् गणेश
स्थान भारत एवं भारत के राज्य
मान्यता इसी दिन भगवान् गणेश, माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत से नीचे उतर के पृथ्वी पे आये थे l 

गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है ?

गणेश चतुर्थी जिसे विनायक (भगवान् गणेश का ही एक नाम) चतुर्थी भी कहा जाता है, हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है l यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष भगवान् गणेश और माता पार्वती के कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर आने की याद में मनाया जाता है l लोग अपने-अपने घरों में मिट्टी से बने भगवान् गणेश की प्रतिमा को बड़े ही उत्साह से स्थापित करते हैं और उनके समक्ष वैदिक मंत्रो का जाप तथा परिवार जनो द्वारा गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पे व्रत भी धारण किया जाता है l

गणेश चतुर्थी में प्रसाद और भोग के रूप में भगवान् गणेश का प्रिय मोदक बनाया जाता है तथा श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है l अपने प्रारम्भ के दसवे दिन भगवान् गणेश जी की प्रतिमा को काफी धूम-धाम व गाजे-बाजे के साथ सन्निकट स्थित जल-श्रोत जोकि नदी या समुद्र हो सकता है में विसर्जित करके विदा किया जाता है l श्रद्धालुओं में ऐसी मान्यता है कि दसवें दिन भगवान् गणेश अपनी माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पे वापस लौट जाते हैं l भगवान् गणेश को सृजन एवं विघ्न संहारक के साथ-साथ ज्ञान और बुद्धि का देवता माना जाता है l

गणेश चतुर्थी का त्यौहार सम्पूर्ण भारत में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है जिसमें महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, ओडिशा, वेस्ट बंगाल, गुजरात, और छत्तीसगढ़ प्रमुख हैं l गणेश चतुर्थी का यह पावन पर्व भारत के पड़ोसी देश नेपाल और विश्व के उन देशों में भी मनाया जाता है जहाँ हिन्दू आबादी रहती है जिनमे ऑस्ट्रेलिया,न्यूज़ीलैण्ड, कनाडा, मलेशिया, फिजी, साउथ अफ्रीका प्रमुख हैं l

गणेश पूजा का निहितार्थ यही है कि हम बुद्धि को तो सर्वोपरि माने, लेकिन इसके बावजूद हमारे कार्यों और व्यवहार में सद्बुद्धि की छाप हो l बुद्धि के ही उपयोग से आज विज्ञान समृद्ध हुआ है और तकनीक ने हमारे जीवन को आसान बनाया है l लेकिन हम तकनीक का प्रयोग भी इस प्रकार करें कि अपने और दूसरों के जीवन में खुशहाली ला सकें l यह हमें गणेश जी से ही सीखने को मिलता है कि हम सदैव अपनी बुद्धि को सकारात्मक और सृजनात्मक कार्यों में ही लगाएं l

मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन बुद्धि के देवता गणेश जी का आविर्भाव हुआ था l इस दिन गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है और गणेश उत्सव मनाया जाता है l इस बार कोरोना काल में भले ही समारोहपूर्वक उत्सव हम न मना सकें, लेकिन हमें गणपति के सन्देश को समझना चाहिए और अपनी बुद्धि को सद्कार्यों में लगाना चाहिए l

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः i

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

कौन हैं भगवान् गणेश ?

गणेश जी भगवान् शिव एवं माता पार्वती के पुत्र हैं, इन्हें बुद्धि से जोड़के देखा जाता है और जिस प्रकार हमारे शरीर में बुद्धि के श्रोत मस्तिष्क को सबसे ऊपर स्थान दिया गया है उसी प्रकार हिन्दू मान्यताओं में किसी शुभ कार्य में भगवान् गणेश को सबसे ऊपर स्थान मिला हुआ है l ज्ञान के द्वारा ही कोई व्यक्ति जीवन की जटिलताओं के बावजूद अपने लिए सही राह का चयन कर पाता है l ज्ञान की वाहक है बुद्धि और हम सब लोग बुद्धि द्वारा ही संचालित होते हैं l बुद्धि द्वारा ही जगत के सम्पूर्ण कार्य संपन्न होते हैं l

गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता कहा गया है l इसका भावार्थ यह है कि जो भी व्यक्ति अपने काम को पूर्ण करना चाहता है, उसे सर्वप्रथम अपनी बुद्धि को परखना होगा, उस पर विश्वास करना होगा और उसके प्रयोग से सफलता प्राप्त करनी होगी l गणेश जी मंगलकर्ता और विघ्नविनाशक हैं अर्थात बुद्धि के सदुपयोग से सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं l

श्री गणेश का स्वरुप अत्यंत प्रेरणा देने वाला है l इनका विशाल गजमुख बुद्धि की विशालता का परिचायक है l उन्होंने मस्तक पर चन्द्रमा को धारण किया हुआ है l चन्द्र शीतलता का प्रतीक है, बुद्धि तभी सही ढंग से कार्य करती है जब जब दिमाग ठंडा रहे l ठन्डे दिमाग से किये गए कार्यों की गुणवत्ता अधिक होती है l इसी प्रकार जब जीवन में कठिन क्षण आते हैं तब भी यदि हम ठन्डे दिमाग से उसका हल निकालेंगे तो हम कठिनाइयों को पार कर लेंगे l गणेश जी के कान व नाक विशाल हैं, जबकि मुंह उनकी तुलना में छोटा है, इसका मर्म यह है कि व्यक्ति को सभी की बात सुननी चाहिए और स्थितियों को सदैव सूंघ लेना चाहिए, लेकिन हम जो भी बात बोले, उसे कम और जाँच-परख कर बोलें l जो बुद्धि का सम्मान करता है और बुद्धि को सद्कार्यों में लगाता है, वह बुद्धिमान अथवा बुद्धिजीवी कहलाता है l

ऊँ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने ।

दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ॥

गणेश जी की पूजन विधि

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी होती है। शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि विघ्नहर्ता श्रीगणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन ही हुआ था। इसलिए गणेशोत्सव मनाया जाता है। इस बार चतुर्थी तिथि 21 अगस्त दिन शुक्रवार की रात 11 बजकर 02 मिनट से  22 अगस्त दिन शनिवार को शाम 07 बजकर 57 मिनट तक है। गणेश जी को उनके खास मोदकों का भोग लगाया जाता है। भगवान् गणेश की पूजा में लाल चन्दन, कपूर, नारियल, गुड़, और प्रिय मोदक चढ़ाया जाता है l लोग रोजाना 10 दिनों तक मन्त्रों का उच्चारण करते हैं और आरती गाकर गणेश जी की पूजा करते हैं l पूरे 10 दिनों की पूजा के बाद 11वें दिन गणेश जी की प्रतिमा को नजदीकी जलश्रोत जैसे-नदी या समुद्र में विसर्जित करके उनकी विदाई की जाती है l

कहते हैं इन दस दिनों में गणपति अपने भक्तों के हर दुख दूर करके ले जाते हैं। हर काम में सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश जी का यह उत्सव 10 दिन तक चलता हैं। इस दिन चंद्र या चाँद को नहीं देखना चाहिए।

त्रिलोकेश गुणातीत गुणक्षोम नमो नमः i

त्रैलोक्यपालन विभो विश्वव्यापिन् नमो नमः ॥

भगवान् गणेश से सम्बंधित कुछ मन्त्र

ॐ गं गणपतये नमः

इस मन्त्र का जप करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।

गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:

इस मन्त्र का जाप करने से मनुष्य के जीवन से आलस्य , निराशा, कलह और विघ्न दूर हो जाते हैं l

ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

इस मन्त्र का जाप करने से जीवन में चल रही आर्थिक एवं रोजगार सम्बंधित परेशानियों का निवारण होता है l

ॐ गंं नमः

इस मन्त्र का जाप करने से जीवन में खोया हुआ आत्मबल और आये हुए विघ्न को दूर करने में मदद मिलती है l

जय विघ्नकृतामाद्या भक्तनिर्विघ्नकारक ।

अविघ्न विघ्नशमन महाविध्नैकविघ्नकृत् ॥

कोरोना काल में कैसे मनाये गणेश चतुर्थी

जैसा कि हमारे धार्मिक ग्रंथो में भगवान् गणेश को बुद्धि का देवता माना गया है वैसे ही हमें भी अपने बुद्धि और विवेक का प्रयोग करके कोरोना काल के इस विषम परिस्थिति में गणेश चतुर्थी का ये पर्व मनाना है l हमें एक जगह इकठ्ठा होकर भीड़ नहीं बनानी है और अगर हम बाहर निकल रहे हैं तो हमें मास्क भी पहनना है l दोस्तों हमें अपने गणपति बप्पा से यही आशीर्वाद माँगना है कि जल्द ही वो अपने विघ्नहर्ता रूप को धारण करें और इस कोरोना रुपी राक्षस का संहार करें, ताकि हम अगले साल और अपने जीवनकाल में आने वाले अनेको-अनेक गणेश चतुर्थी का यह पावन पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मना सकें l

इस बार कोरोना काल में घर में रहकर ही गणेश जी का पूजन करना चाहिए। सामूहिक कार्यक्रमों से बचना चाहिए।

गणपती बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया  

लम्बोदराय वै तुभ्यं सर्वोदरगताय च ।

अमायिने च मायाया आधाराय नमो नमः ॥

   

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