गीता भारतीय-साहित्य की अमर निधि है | श्रीमद् भगवद् गीता हिन्दू धर्म का सबसे ज्यादा पावन और बहुत ही प्राचीन ग्रन्थ है | हमारे हिन्दू धर्म में ऐसा माना जाता है कि भगवद-गीता एक ऐसा महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो हमें जन्म और मृत्यु के चक्र से निकलने में मदद कर सकता है | दूसरे शब्दों में हमें मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है |

जो कोई भी भक्ति के साथ भगवद-गीता का पाठ करता है, वह मृत्यु के समय आध्यात्मिक दुनिया में चला जाएगा। अगर कोई गीता को निष्कपट भावना से पढ़ता है तो वह पिछले बुरे कर्मों से भी मुक्त हो जाता है |

अर्थात, अगर संक्षेप में कहें तो , हम प्रतिदिन शास्त्र को पढ़कर अपने बुरे कर्म को बदल सकते हैं |

श्रीमद्भगवद्गीता के टीकाकारों का मत है कि गीता तीन भागों में विभक्त है | इसके कुल १८ अध्याय है जिनमें से पहले छः अध्याय ‘कर्मयोग’ पर हैं , अगले छः ‘भक्तियोग’ पर हैं और अन्तिम छः ‘ज्ञानयोग’ पर हैं | गीता के टीकाकार भी तीन दृष्टिओं को लेकर चले हैं | 

‘ये यथा मां प्रपद्यन्ते तान् तथैव भजाम्यह्म’ ( श्लोक ४.११ ) का यही अर्थ है — जो जिस मार्ग से भगवान् को पाना चाहता है , ज्ञान-मार्ग से हो, भक्ति-मार्ग से हो, कर्म-मार्ग से हो, सब मार्गों से वहीं पहुंचते हैं , इन मार्गों में आपस में कोई विरोध नहीं है | जो लोग इन मार्गों में विरोध समझते हैं वे गीता के तत्त्व को नहीं समझते |

गीता की आध्यात्मिक पृष्ठ-भूमि

प्राचीन आध्यात्मिक-साहित्य में ‘प्रस्थान-त्रयी’ शब्द प्रसिद्ध है | ‘प्रस्थान-त्रयी’ इस देश के सर्वोच्च आध्यात्मिक-साहित्य का नाम है | ‘प्रस्थान’ का अर्थ है – जीवन की यात्रा में प्रस्थान, किसी उद्देश्य के लिए चल पड़ना, निरुद्देश्य न भटकते रहना | इस प्रकार के जीवन की दिशा का निर्धारण करने वाले संस्कृत-साहित्य में तीन ग्रन्थ हैं – उपनिषद, गीता तथा वेदान्त दर्शन | ये तीनो संस्कृत के अमर साहित्य हैं , इन तीनों का लक्ष्य मानव-जीवन को सोद्देश्य बना देना है | यह लेख सुप्रसिद्ध साहित्य ‘प्रस्थान-त्रयी’ के द्वितीय अंग गीता का है |

‘गीता’ महाभारत के भीष्म-पर्व का एक भाव है | भीष्म-पर्व में २५ से ४२ तक जो अध्याय हैं वे ही ‘गीता’ कहलाते हैं | महाभारत के रचयिता वेद-व्यास हैं , इसलिये ‘गीता’ के रचयिता भी वेद-व्यास ही हैं |

गीता उपनिषदों का सार है | गीता-ध्यान में इस ग्रन्थ के विषय में लिखा है:

सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दनः|
पार्थो वत्सः सुधीर्भोक्ता दुग्धं गीतामृतं महत् ||

हिन्दी अनुवाद ( Hindi Translation ) : सब उपनिषद मानो गौएँ हैं; ग्वालों का प्यारा श्रीकृष्ण मानो इन गौओं का दूध दुहने वाला है; अर्जुन मानो इन गौओं को पौसाने वाला बछड़ा है; गौओं के पास आने पर उस रस का भोगने वाला हर-एक जिज्ञासु है; यह जिज्ञासु जिस अमृत का पान करता है वह गीता-गोमाता का महान् ज्ञानमृतरूपी दूध है |

उक्त कथन अभिप्राय यह है कि गीता ज्ञानामृत अर्जुन के लिए ही नहीं है, इसकी धारा अमरत्व के हर-एक पिपासु के लिए बह रही है | जो भी इस अमृत का पान करे वही अर्जुन है |

प्रस्तावना (Preface)

गीता की महान गाथा की शुरुवात कुरुक्षेत्र के धूल भरे मैदानों से होती है | द्रुपद, विराट, शिखण्डी , धृष्ट्द्युम्न , सात्यकि, चेकितान तथा भीमसेन — ये सात सेनापति पांडवों की सेना में नियुक्त हुए ; कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, शल्य, जयद्रथ, काम्बोज नरेश सुदक्षिण, भोजराज कृतवर्मा, अश्वथामा, कर्ण, भूरिश्रवा, शकुनि तथा बाल्हीक — ये ग्यारह सेनापति कौरवों की सेनाओं में नियुक्त हुए

अर्जुन , विश्व के सर्वश्रेष्ठ तीरंदाज, युद्ध के लिए तैयार हैं | लेकिन अपने सामने युद्ध-स्थल पर अपने मित्र, गुरु और परिजनों को देखकर, अर्जुन के अन्दर शंका और संकोच की भावना जाग उठती है | अर्जुन श्रीकृष्ण से कहते हैं की वह इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहते जहाँ अपने मित्रों, गुरुओं और परिजनों के ऊपर शस्त्र उठाना पड़े और उसका परिणाम ढेरों मृत्यु और दुःख हो | वह अपने महान धनुष को फेंकते हुए यह घोषणा कर देते हैं कि वह युद्ध नहीं करेंगे।

धृतराष्ट्र के चक्षु संजय ( Sanjay - Eyes of Dhritrashtra )

युद्ध के पूर्व, कृष्णा ने संजय को दिव्य दृष्टि से सम्पन्न किया, ताकि वह मीलों दूर भी युद्ध के मैदान में होने वाली हर चीज को देख सके और धृतराष्ट्र को उसका उल्लेख दे सके | गीता की शुरुआत धृतराष्ट्र से होती है जो संजय से पूछते हैं कि कुरुक्षेत्र में क्या हो रहा है; संजय तब अर्जुन की निराशा, कृष्ण की प्रतिक्रिया, और उनके संपूर्ण संवाद का वर्णन करते हैं जो अंततः अर्जुन की अस्तित्व की प्रकृति, ब्रह्मांडीय क्रम में उसकी जगह की समझ, और क्यों उसे आने वाली लड़ाई में भाग लेना है।

इसी के साथ श्रीमद् भगवद् गीता का महान एवं असामान्य गाथा की शुरुवात होती है | गीता में समस्त १८ अध्याय हैं और इसमें ७०० श्लोकों का संग्रह है | हमने इन श्लोकों का अत्यन्त ही सरल अनुवाद हिन्दी में देने का प्रयास किया है | आप हर एक अध्याय को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके जा सकते हैं

3 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here